ढाई दशक बाद विधानसभा लौट सकते हैं अधीर चौधरी
कोलकाता। विधानसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच कांग्रेस खेमे से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है। करीब 25 वर्षों तक देश की संसद में बंगाल की बुलंद आवाज रहे कांग्रेस के कद्दावर नेता अधीर रंजन चौधरी एक बार फिर राज्य की सक्रिय राजनीति में वापसी कर सकते हैं।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि पार्टी उन्हें मुर्शिदाबाद के उनके गढ़, बहरामपुर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। यदि ऐसा होता है, तो यह बंगाल चुनाव के सबसे दिलचस्प मुकाबलों में से एक होगा। अधीर रंजन चौधरी का संसदीय सफर भले ही ढाई दशक लंबा रहा हो, लेकिन उनके पास विधानसभा का भी पुराना अनुभव है। वे पहली बार 1996 में मुर्शिदाबाद के नवग्राम से विधायक चुने गए थे और 1999 तक विधानसभा के सदस्य रहे, जिसके बाद वे लोकसभा पहुंचे और लगातार पांच बार सांसद रहे। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल के उम्मीदवार और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान से मिली हार के बाद समीकरण बदल गए हैं। वर्तमान में अधीर न तो सांसद हैं और न ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी उन पर है, क्योंकि यह पद अब शुभंकर सरकार को सौंपा जा चुका है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व का मानना है कि उन्हें चुनावी मैदान में उतारकर संगठन को मजबूती दी जा सकती है। बहरामपुर विधानसभा सीट पर अधीर चौधरी की संभावित दावेदारी ने पहले से ही चुनावी मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। भाजपा ने यहाँ से अपने मौजूदा विधायक सुब्रत मैत्रा पर फिर से भरोसा जताया है, वहीं तृणमूल ने नारुगोपाल मुखोपाध्याय को मैदान में उतारा है।
स्थानीय राजनीति के जानकारों का मानना है कि बहरामपुर में अधीर का व्यक्तिगत प्रभाव आज भी कायम है और उनके मैदान में उतरने से वोटों का ध्रुवीकरण पूरी तरह बदल सकता है। कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की आगामी बैठक में इस पर अंतिम मुहर लग सकती है। फिलहाल कांग्रेस के भीतर दो तरह की राय उभर रही है। एक धड़ा चाहता है कि अधीर चौधरी स्वयं चुनाव लड़कर पार्टी के लिए एक मजबूत सीट सुनिश्चित करें, जबकि दूसरा धड़ा उन्हें पूरे राज्य में स्टार प्रचारक के रूप में देखना चाहता है। हालांकि, दिल्ली से संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी उन्हें विधानसभा भेजकर राज्य इकाई में एक कद्दावर चेहरा बनाए रखना चाहती है। अब सबकी निगाहें कांग्रेस की आधिकारिक सूची पर टिकी हैं, जो यह स्पष्ट करेगी कि बहरामपुर के रॉबिनहुड कहे जाने वाले अधीर फिर से राज्य विधानसभा की सीढिय़ां चढ़ेंगे या नहीं।